Saturday, June 17, 2023

पाठ – 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ (हड़प्पा सभ्यता)In this post we have given the detailed notes of class 12 History Chapter 1

 पाठ – 1
ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ (हड़प्पा सभ्यता)


In this post we have given the detailed notes of class 12 History Chapter 1 Ente, Manke Tatha Asthiyan (Bricks, Beads and Bones) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 12 board exams.


इस पोस्ट में क्लास 12 के इतिहास के पाठ 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ (Bricks, Beads and Bones) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 12 में है एवं इतिहास विषय पढ़ रहे है।


Board CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board

Textbook NCERT

Class Class 12

Subject History

Chapter no. Chapter 1

Chapter Name ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ (Bricks, Beads and Bones)

Category Class 12 History Notes in Hindi

Medium Hindi

Class 12 History Chapter 1 Ente, manke tatha asthiyan in Hindi


Class 12th (History) Ch 1 (Bricks, Beads and Bones) in Hindi | Latest Syllabus 2021 | ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ | Part – 1 |


Class 12th (History) Ch 1 (Bricks, Beads and Bones) in Hindi | Latest Syllabus 2021 | ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ | Part – 2 |

Table of Content

सभ्यता किसे कहा जाता है

लोगों के एक ऐसे समूह को सभ्यता कहा जाता है जिनके रहन-सहन जीवन निर्वाह के तरीके विचारधाराएं और मान्यताएं विशेष हो


विश्व की मुख्य सभ्यताएं

1920 से पहले ऐसा माना जाता था कि मिस्र की सभ्यता, मेसोपोटामिया की सभ्यता और चीन की सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है परंतु फिर हड़प्पा सभ्यता की खोज हुई और तब से यह भी विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक बन गई


हड़प्पा सभ्यता की खोज

  • आज से लगभग 160 साल पहले सन 1856 में पंजाब वर्तमान पाकिस्तान रेलवे लाइन बिछाने का कार्य चल रहा था

  • उन स्थानों पर खुदाई की जा रही थी और इसी दौरान लोगों को कुछ पुरानी ईट एवं अवशेष मिले
  • उस समय यह लोग नहीं समझ पाए कि इनका महत्व क्या है और रेल की पटरी बिछाने के कार्य को जारी रखा गया
  • सन 1861 में कोलकाता में भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना की गई
  • पुरातत्व विभाग वह संस्था है जो एक देश के इतिहास से संबंधित जानकारियों की जांच करता है
  • इसके पहले डायरेक्टर एलेग्जेंडर कनिंघम थे
  • इन्हें ही भारतीय इतिहास का जनक कहा जाता है
  • इनके बाद जॉन मार्शल 1902 से 1928 पुरातत्व विभाग के डायरेक्टर बने
  • इन्हीं के दौर में हड़प्पा सभ्यता की खोज की गई
  • सन 1921 में जॉन मार्शल के नेतृत्व में दयाराम साहनी द्वारा हड़प्पा सभ्यता की खोज की गई
  • हड़प्पा सभ्यता को अलग-अलग नामों से जाना जाता है

हड़प्पा सभ्यता

 इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता इसीलिए कहा जाता है क्योंकि हड़प्पा नाम के स्थान पर इस सभ्यता के शुरुआती अवशेष मिले थे

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Velley Civilisation)

इस सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाता है क्योंकि यह सिंधु नदी के किनारे बसी थी

कांस्य युग सभ्यता

  • इस सभ्यता को कांस्य युग सभ्यता इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इन्होंने तांबे में टिन मिलाकर कांस्य की खोज की थी
  • हड़प्पा सभ्यता की भौगोलिक विशेषताएं
  • क्षेत्रफल लगभग 12,99,600 वर्ग किलोमीटर
  • वर्तमान में देखें तो यह सभ्यता अफगानिस्तान, पाकिस्तान से होती हुई भारत में ऊपर जम्मू कश्मीर से नीचे गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों तक फैली हुई थी
  • इस सभ्यता को त्रिभुजआकार वाली सभ्यता भी कहा जाता है क्योंकि यह त्रिभुजाकार क्षेत्र में फैली हुई थी
  • मेसोपोटामिया और मिस्र की सभ्यता हड़प्पा सभ्यता की समकालीन सभ्यताएं हैं यानी यह सभी सभ्यताएं विश्व में एक ही समय पर थी
  • हड़प्पा सभ्यता का काल 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व तक माना जाता है

हड़प्पा सभ्यता में निर्वाह के तरीके

  • कृषि, पशुपालन, शिकार
  • कृषि
  • हड़प्पा सभ्यता के लोग मुख्य रूप से गेहूं, जौ, दाल, बाजरा, सफेद चना आदि उगाते थे
  • सिंचाई के लिए नहरों एवं कुओं का प्रयोग करते थे
  • हड़प्पा ही मोहरों में वृषभ बैल की जानकारी मिलती है इससे अनुमान लगाया गया कि हड़प्पा के लोग खेत जोतने के लिए बैल का प्रयोग किया करते थे
  • कई जगहों पर हल के प्रतिरूप भी मिले हैं जिनसे यह पता चलता है कि खेतों में हल के द्वारा जुताई की जाती थी
  • कालीबंगन और राजस्थान में जुते हुए खेत के प्रमाण मिले हैं जिन्हें देखकर लगता है कि एक साथ दो अलग-अलग फसलें उगाई जाती थी
  • हड़प्पा सभ्यता के लोग लकड़ी और पत्थर के बने औजारों का प्रयोग फसल कटाई के लिए किया करते थे

पशुपालन

हड़प्पा स्थलों से मवेशी, भेड़, बकरी, भैंस तथा सूअर जैसे जानवरों की हड्डियां प्राप्त हुई है जिससे पता चलता है कि यह लोग इन जानवरों को पालते थे

शिकार

यहां पर मछली, पक्षियों एवं जंगली जानवरों की हड्डियां भी मिली है जिनसे अनुमान लगाया गया है कि हड़प्पा के निवासी जानवरों का मांस खाया करते थे

मोहनजोदड़ो

मोहनजोदड़ो हड़प्पा सभ्यता के दो मुख्य शहरों में से एक है इसमें से पहला शहर हड़प्पा तथा दूसरा मोहनजोदड़ो है


मोहनजोदड़ो की विशेषताएं

यह हड़प्पा सभ्यता के सबसे मुख्य शहरों में से एक था

यह आधुनिक पाकिस्तान के लरकाना जिले में स्थित है

इसका क्षेत्रफल लगभग 125 हेक्टेयर था

मोहनजोदड़ो में नगर को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया था

दुर्ग और निचला शहर

दुर्ग

  • दुर्ग आकार में छोटा था
  • इसे ऊंचाई पर बनाया गया था
  • दुर्ग को चारों तरफ दीवार से घेरा गया था
  • यह दीवार ही इसे निचले शहर से अलग करती थी

निचला शहर

  • निचला शहर आकार में दुर्ग से बड़ा था
  • यह सामान्य लोगों के लिए बनाया गया था
  • यहां की मुख्य विशेषताएं इसकी जल निकासी प्रणाली थी

दुर्ग 

माल गोदाम (अन्न गृह )

यह एक बड़े आकार का गोदाम होता था जिसमें अनाज को रखा जाता था

विशाल स्नानागार

  • दुर्ग पर बहुत बड़े-बड़े स्नानागार के अवशेष मिले हैं इनका आकार 12 मीटर लंबा 7 मीटर चौड़ा और लगभग 2.4m गहरा था
  • इसके चारों और बरामदे होते थे
  • स्नानागार को भरने के लिए कुओं का प्रबंध था
  • ऐसा माना जाता है कि इनका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए या विशेष अवसरों पर नहाने के लिए किया जाता था
  • जलाशयों में तल तक जाने के लिए उत्तरी और दक्षिणी और से सीढ़ियां भी बनाई गई थी
  • इन सभी जलाशयों को मुख्य नालियों से जोड़ा जाता था

निचला शहर

सड़कें

  • मोहनजोदड़ो में सड़के 4 से 10 मीटर तक चौड़ी थी
  • यहां सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटा करती थी
  • कई इतिहासकारों का कहना है कि सड़को को इस तरह से बनाया गया था ताकि वह हवा के जरिए अपने आप साफ हो जाए

जल निकास प्रणाली

  • नियोजित ढंग से नाली एवं गलियों का निर्माण किया गया था नालियों के निर्माण के लिए जिप्सम के गारे का प्रयोग किया जाता
  • नालियों को ईटों से ढका जाता था ताकि कूड़ा करकट से बचाया जा सके
  • वर्षा जल निकास के लिए विशेष प्रबंध किए गए

भवन निर्माण

  • मोहनजोदड़ो में सफाई का विशेष ध्यान रखा गया था
  • आंगन के चारों तरफ कमरों का निर्माण किया जाता था
  • प्रत्येक घर की दीवार के बाहर एक नाली अवश्य होती थी
  • हर घर में बड़े-बड़े आंगन होते थे
  • हर घर में पक्की ईंटों का बना हुआ स्नानागार होता था
  • घरों के अंदर कुए का निर्माण किया जाता था
  • पानी की निकासी के लिए हर घर में नालियों का प्रबंध किया गया
  • इस आंगन का उपयोग खाना पकाने एवं अन्य कार्यों के लिए किया जाता था
  • निचले कमरों में खिड़कियां नहीं होती थी और दरवाजे आंगन की तरफ खुलते थे
  • स्नानागार की नालियां बाहर गलियों के नालियों से जुड़ी होती थी कई घरों में सीढ़ियां भी मिली है जिससे यह स्पष्ट होता है कि वहां मकान दो मंजिल के भी होते थे
  • अकेले मोहनजोदड़ो में ही लगभग 700 अलग अलग कुए प्राप्त हुए

अन्य विशेषताएं

  • यात्रियों के लिए सराय का निर्माण किया गया था
  • बर्तन पकाने की भट्टी को शहर से बाहर बनाया जाता था ताकि शहर में प्रदूषण ना हो
  • गलियों का निर्माण इस तरीके से किया गया था ताकि सूर्य की रोशनी कोने कोने तक जा सके
  • रात को सुरक्षा के लिए पहरेदार तैनात किए जाते थे
  • कूड़े को नगरों से बाहर गड्ढों में दबाया जाता था

                   सामाजिक विभिन्नता

हड़प्पा समाज में भिन्नता की जानकारी हमें शवाधान एवं विलासिता की वस्तूओं से मिलती है


शवाधान

  • यहां पर अंतिम संस्कार व्यक्ति को दफनाकर किया जाता था पाई गई कब्रों की बनावट एक दूसरे से अलग अलग है कई कब्रों में ईंटों की चिनाई की गई है जबकि कई कब्रे सामान्य है
  • कब्रों में व्यक्तियों के साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी दफना दिए जाते थे क्योंकि शायद हड़प्पा के लोग पुनर्जन्म में विश्वास रखते थे
  • कब्रों में से तांबे के दर्पण मनके और आभूषण आदि भी मिले हैं

विलासिता की वस्तुएं

  • सामाजिक भिन्नता को पहचानने का एक और तरीका होता है विलासिता की वस्तुएं
  • मुख्य रूप से दो प्रकार की वस्तुएं होती हैं
  • रोजमर्रा प्रयोग की जाने वाली वस्तुएं जैसे की चकिया, मिट्टी के बर्तन, सुई, सामान्य औजार आदि
  • इन्हें पत्थर या मिट्टी जैसे सामान्य पदार्थों से बनाया जाता था और यह आसानी से उपलब्ध थी
  • विलासिता की वस्तुएं यह वह वस्तु है जो आसानी से उपलब्ध नहीं थी अर्थात कम मात्रा में मिली है
  • ऐसी वस्तु है जो महंगी या दुर्लभ हो उन्हें कीमती माना जाता है जैसे कि फ़यांस के पात्र, स्वर्णाभूषण
  • हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल लोथल (गुजरात), कालीबंगा (राजस्थान), नागेश्वर (गुजरात), धोलावीरा (गुजरात)

शिल्पकला

  • शिल्पकला के अंदर आभूषण, मूर्तियां, औजार बनाना आदि को शामिल किया जाता है
  • हड़प्पा में मुख्य रूप से मनके, मुहर, बाट बनाए जाते थे, शंख की कटाई की जाती थी और धातु कार्य किए जाते थे
  • हड़प्पा सभ्यता का मुख्य शिल्प उत्पादन केंद्र चन्हुदड़ो, लोथल, और 
  • धौलावीरा में छेद करने का सामान मिला हैं

मोहर और मुंद्राकन

  • मोहर और मुद्रा अंकन का प्रयोग भेजी गई वस्तुओं की सुरक्षा के लिए किया जाता
  • उदाहरण के लिए अगर कोई सामान एक थैले में डालकर कहीं दूर भेजा गया तो उसके मुंह को रस्सी से बांध दिया जाता था और उस रस्सी पर गीली मिट्टी लगाकर उस पर मोहर की छाप लगाई जाती थी
  • अगर उस मोहर की छाप में कोई परिवर्तन आए तो यह सामान के साथ छेड़छाड़ को दर्शाता था
  • साथ ही साथी से भेजे जाने वाले की पहचान का पता भी चलता था

बाट

  • बाट चर्ट नामक पत्थर से बनाए जाते थे
  • इनका प्रयोग आभूषण और मनको को तोलने के लिए किया जाता था

  • मनके
  • मनको को कार्नेलियन लाल रंग का सुंदर पत्थर जैस्पर सेलखड़ी स्फटिक आदि से बनाया जाता था
  • धातु – सोना, तांबा, कांसा, शंख फ्रांस पक्की मिट्टी, कुछ मनको को दो या दो से अधिक पदार्थों को आपस में मिलाकर भी बनाया जाता था
  • मनको का आकार छपराकार, गोलाकार, डोलाकार आदि होता था
  • ऊपर से चित्रकारी द्वारा सजावट की जाती थी
  • पत्थर के प्रकार के अनुसार मनके बनाने की विधि में परिवर्तन आता था
  • सेल खेड़ी एक मुलायम पत्थर था जिसे आसानी से उपयोग में लाया जाता था कई जगह पर सेल खेड़ी के चूर्ण को सांचे में डालकर भी मनके बनाए गए हैं
  • मनके बनाने के लिए घिसाई पॉलिश और छेद करने की प्रक्रियाएं होती थी

    उत्पादन केंद्रों की पहचान कैसे हुई

  • बचा हुआ कच्चा माल, त्यागी हुई वस्तुएं, कूड़ा करकट आदित्य उत्पादन केंद्रों की पहचान होती है
  • जिस जगह पर औजार ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं उन्हें ही उत्पादन केंद्र माना जाता है
  • साथ ही साथ कभी कभी बचा हुआ कच्चा माल भी किसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है या फिर उत्पादन करने के बाद बच्चे हुए अवशेषों से भी उत्पादन केंद्र ज्ञात होते हैं

कच्चे माल की प्राप्ति

  • स्थानीय कच्चा माल
  • मिट्टी पत्थर लकड़ी धातु आदिआदि

  • अन्य क्षेत्रों से मंगाया जाने वाला कच्चा माल

नागेश्वर और बालाकोट से शंख, लोथल से कार्नेलियन पत्थर, राजस्थान और उत्तर गुजरात से सेलखड़ी, राजस्थान के खेतरी से तांबा


  • हड़प्पा लिपि

  • हड़प्पा की लिपि एक चित्रात्मक लिपि थी
  • इसमें लगभग 375 से 400 के बीच चिन्ह थे
  • इसे दाएं से बाएं लिखा जाता था
  • इस लिपि को आज तक पढ़ा नहीं जा सका है इसीलिए इसे रहस्यमय लिपि कहा जाता है

हड़प्पा संस्कृति में शासन

हड़प्पा संस्कृति में शासन को लेकर तीन अलग-अलग मत हैं


पहला मत

कुछ पुरातत्वविद मानते हैं कि हड़प्पा समाज में शासक नहीं थे सभी की स्थिति सामान्य थी

दूसरा मत

हड़प्पा सभ्यता में कोई एक शासक नहीं था बल्कि एक से अधिक शासक थे

तीसरा मत

  • हड़प्पा एक राज्य था क्योंकि इतने बड़े आकार में फैला होने के बावजूद भी पूरे क्षेत्र में कई समानताएं थी जैसे कि वस्तुएं
  • नियोजित बस्ती
  • ईटों का आकार
  • समाज की संरचना
  • जीवन निर्वाह के तरीके
  • धार्मिक मान्यताएं
  • ऐसा माना जाता है कि हड़प्पा के लोग प्रकृति की पूजा किया करते थे
  • कुछ मोहरों में अनुष्ठान के दृश्य मिले हैं
  • मोहरो पर पेड़ पौधों को भी पाया गया है
  • आभूषणों से लदी हुई एक नारी की मूर्ति मिली है जिसे मात्र देवी कहा जाता था
  • कालीबंगा और लोथल जैसे क्षेत्रों में विशाल स्नानागार मिले हैं जो सामूहिक स्नान के लिए उपयोग किए जाते थे
  • कुछ मोहरों में एक व्यक्ति को योग मुद्रा में बैठे दिखाया गया है
  • पत्थर के शब्दों को शिवलिंग के रूप में वर्गीकृत किया गया है
  • ऐसा माना जाता है कि यह हिंदू धर्म के मुख्य देवता शिव की आराधना किया करते थे

हड़प्पा सभ्यता का पतन

  • ऐसा माना जाता है कि हड़प्पा सभ्यता का अंत किसी प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ जैसे कि

  • भूकंप
  • सिंधु नदी का रास्ता बदलना
  • जलवायु परिवर्तन 
  • वनों की कटाई
  • आर्यों का आक्रमण
  • कनिंघम का भ्रम

भारतीय पुरातत्व विभाग का पहला डायरेक्टर जनरल कनिंघम था


कनिंघम ने क्या भूल की

उन्हें लगा कि हड़प्पा सभ्यता कोई बड़ी सभ्यता नहीं बल्कि छोटी सी सभ्यता है 

हड़प्पा की मोहरो को समझने में असफल रहे 

हड़प्पा का काल निर्धारण करने में असफल रहे

उन्होंने हड़प्पा अवशेषों को वैदिक काल से जोड़ कर देखा जबकि वह उससे भी पुराने थे

उन्होंने केवल लिखित प्रमाणों पर विश्वास किया जिस वजह से वह गलती कर बैठे

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किसी के दर्द की बैंडेज मत बनो ❌ क्योंकि जब घाव भर जाएगा तो 🖤 तुम कूड़ेदान में फेंक दिए जाओगे 💔 #anymaurya

 हमें कोई शौक नहीं उसका इंतजार करने का बेफिजूल में किसी के लिए आंहें भरने का - पर जब भी याद उसकी आती है, मेरी रूह तक रुला जाती है

कभी हम भी शौंक रखते थे अपने अल्फाजों से सबका दिल जीतने का - पर वो बेमुरवत, मेरे लफ़्ज़ों की मुस्कान छीन ले जाती है!

क्या खोया, क्या पाया, क्या खबर मुझे उसकी यादों के गिरफ्त से मेरी रूह रुखसती नहीं पाती है।।






नहीं कर सकता कोई वैज्ञानिक मेरी बराबरी..
मै चांद को देखने साइकिल से जाया करता था
।🥺❤️


Sad shayari all Hindi English:
दिसम्बर बिखर गया था जनवरी के स्वागत में,

फरवरी तो जान ही ले लेगी एकतरफा चाहत में...

मैं ख़त लिखता रहा,




वो जहाज़ बना के उड़ाती गई !!

रोतीे हुई आँखों😢 और अल्फाजो के दर्द💔 सब पढ़ लेते हैं...!!

कभी कोई उनका भी दर्द पढ़ो जो कभी जाहिर नही होने देते हैं...!!!

*इश्क़ किया है तो उसका हिसाब क्यों करें!..*

*महसूस तुम ही करलो ना,बया क्यों करें..!*

अब उससे कोई हिसाब बाकी नही रहा..,


अब इन आँखो मे कोई ख्वाब बाकी नही रहा..!

गैरों का हाथ पकड़कर चलना नहीं सीखा...!!

बहुत कुछ सीखा...लेकिन बदलना नहीं सीखा...!!!

मुझे पिलाने की कोशिश मत कर

मेरे दोस्त मैं पीउगा नही










क्यों मिटाना चाहते हो
मेरे जहन से उसकी यादें मैं जिऊंगा नहीं

तुम्हारे जाने के बाद कितना टूटे हैं ये हम ही जानते हैं।
..
बताते नहीं किसी को, क्यूकी अब हम सिर्फ खुद की अपना मानते है।

चलो मैं हो जाऊँगा खामोश, किसी रोज तुम्हारे बगैर...!

हमारे इश्क़ में तुम्हारी, कोई तो ख्वाइश पूरी हो...!!

उतार फेकी उसने तोहफ़े की वो पायल...,_

      उसे ड़र था छनकेगी तो याद आऊंगा में....!_

इश्क हुआ है हमसे तो
हमसे मुलाकात कीजिए ।।।

आप वफा की उम्मीद रखते है
पहले खुद तो वफा कीजिए

तू मुझमें पहले भी था ,
तू मुझमें अब भी है।






पहले मेरे लफ्जों में था
अब मेरी खामोशियों में है।😔😔😒


फासले रख के क्या हासिल कर लिया तूने...
रहती तो आज भी तू मेरे दिल में ही है...

जान लोगो की इश्क में जा रही है...


     और वैक्सीन हम कोरोना की बना रहे है!!

याद ना दिलाओ वो पल इश्क़ का
बड़ी लम्बी कहानी है,
मैं किसी और से क्या कहूं
जब उनकी ही मेहरबानी हैं...!!

Friday, June 16, 2023

कहानी-भगवान बचाएगा'🔺

 .        🔺'कहानी-भगवान बचाएगा'🔺
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एक समय की बात है किसी गाँव  में  एक  साधु रहता  था, वह  भगवान का बहुत बड़ा भक्त था और निरंतर एक पेड़ के नीचे  बैठ  कर  तपस्या  किया करता था उसका  भागवान  पर  अटूट  विश्वास  था और गाँव वाले भी उसकी इज्ज़त करते थे.

एक बार गाँव  में बहुत भीषण बाढ़  आ  गई.चारो तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा, सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों की तरफ बढ़ने लगे | जब लोगों ने देखा कि साधु महाराज अभी भी पेड़ के नीचे बैठे भगवान का नाम जप  रहे हैं तो उन्हें यह जगह छोड़ने की सलाह दी| पर साधु ने कहा-

तुम लोग अपनी  जान बचाओ मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा!”

धीरे-धीरे पानी  का  स्तर बढ़ता गया , और पानी साधु के कमर तक आ पहुंचा , इतने में वहां से एक नाव  गुजरी.

मल्लाह ने कहा- ” हे साधू महाराज आप इस नाव पर सवार हो जाइए मैं आपको सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दूंगा ”

“नहीं, मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता नहीं है , मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा !! “साधु ने उत्तर दिया.

नाव वाला चुप-चाप वहां से चला गया.

कुछ देर बाद बाढ़ और प्रचंड हो गयी , साधु ने पेड़ पर चढ़ना उचित समझा और वहां बैठ कर ईश्वर को याद करने लगा. तभी अचानक उन्हें गड़गडाहत की आवाज़ सुनाई दी, एक हेलिकोप्टर उनकी मदद के लिए आ पहुंचा, बचाव दल  ने एक रस्सी लटकाई  और साधु को उसे जोर से पकड़ने का आग्रह किया.

पर साधु फिर बोला-” मैं इसे नहीं पकडूँगा, मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा”

उनकी हठ के आगे बचाव दल भी उन्हें लिए बगैर वहां से चला गया.

कुछ ही देर में पेड़ बाढ़ की धारा में बह गया और साधु की मृत्यु हो गयी.

मरने  के  बाद  साधु महाराज स्वर्ग पहुचे और भगवान  से बोले -”हे  प्रभु मैंने  तुम्हारी  पूरी  लगन के साथ आराधना की… तपस्या  की पर जब  मै  पानी में डूब कर मर  रहा था तब  तुम मुझे  बचाने  नहीं  आये, ऐसा क्यों प्रभु ?

भगवान बोले ,” हे साधु महात्मा  मै तुम्हारी रक्षा करने एक  नहीं बल्कि तीन  बार  आया ,पहला, ग्रामीणों के रूप में , दूसरा नाव वाले के रूप में और तीसरा ,हेलीकाप्टर बचाव दल के रूप में. किन्तु तुम मेरे इन अवसरों को पहचान नहीं पाए..

मित्रों, इस जीवन में ईश्वर हमें कई अवसर देता है , इन अवसरों की प्रकृति कुछ ऐसी होती  है कि वे  किसी  की प्रतीक्षा  नहीं  करते  है , वे  एक  दौड़ते  हुआ  घोड़े के सामान होते हैं जो हमारे सामने से तेजी से गुजरते हैं  , यदि हम उन्हें पहचान कर उनका लाभ उठा लेते  है  तो  वे  हमें   हमारी  मंजिल   तक  पंहुचा  देते  है, अन्यथा हमें बाद में पछताना ही पड़ता है



◾️लोहार की ईमानदारी

एक बढ़ई किसी गांव में काम करने गया, लेकिन वह अपना हथौड़ा साथ ले जाना भूल गया। उसने गांव के लोहार के पास जाकर कहा, 'मेरे लिए एक अच्छा सा हथौड़ा बना दो।

मेरा हथौड़ा घर पर ही छूट गया है।' लोहार ने कहा, 'बना दूंगा पर तुम्हें दो दिन इंतजार करना पड़ेगा। हथौड़े के लिए मुझे अच्छा लोहा चाहिए। वह कल मिलेगा।'

दो दिनों में लोहार ने बढ़ई को हथौड़ा बना कर दे दिया। हथौड़ा सचमुच अच्छा था। बढ़ई को उससे काम करने में काफी सहूलियत महसूस हुई। बढ़ई की सिफारिश पर एक दिन एक ठेकेदार लोहार के पास पहुंचा।

उसने हथौड़ों का बड़ा ऑर्डर देते हुए यह भी कहा कि 'पहले बनाए हथौड़ों से अच्छा बनाना।' लोहार बोला, 'उनसे अच्छा नहीं बन सकता। जब मैं कोई चीज बनाता हूं तो उसमें अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखता, चाहे कोई भी बनवाए।'

धीरे-धीरे लोहार की शोहरत चारों तरफ फैल गई। एक दिन शहर से एक बड़ा व्यापारी आया और लोहार से बोला, 'मैं तुम्हें डेढ़ गुना दाम दूंगा, शर्त यह होगी कि भविष्य में तुम सारे हथौड़े केवल मेरे लिए ही बनाओगे। हथौड़ा बनाकर दूसरों को नहीं बेचोगे।'

लोहार ने इनकार कर दिया और कहा, 'मुझे अपने इसी दाम में पूर्ण संतुष्टि है। अपनी मेहनत का मूल्य मैं खुद निर्धारित करना चाहता हूं। आपने फायदे के लिए मैं किसी दूसरे के शोषण का माध्यम नहीं बन सकता।

आप मुझे जितने अधिक पैसे देंगे, उसका दोगुना गरीब खरीदारों से वसूलेंगे। मेरे लालच का बोझ गरीबों पर पड़ेगा, जबकि मैं चाहता हूं कि उन्हें मेरे कौशल का लाभ मिले। मैं आपका प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर सकता।'

सेठ समझ गया कि सच्चाई और ईमानदारी महान शक्तियां हैं। जिस व्यक्ति में ये दोनों शक्तियां मौजूद हैं, उसे किसी प्रकार का प्रलोभन अपने सिद्धांतों से नहीं डिगा सकता।

Tuesday, June 13, 2023

❗0️⃣4️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣3️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️* *!! मुश्किल दौर !!* ~~~~~~~

 2️⃣8️⃣❗0️⃣4️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣3️⃣


         *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*
 

                 *!! मुश्किल दौर !!*

~~~~~~~

एक बार की बात है, एक कक्षा में गुरूजी अपने सभी छात्रों को समझाना चाहते थे कि प्रकृति सभी को समान अवसर देती हैं और उस अवसर का इस्तेमाल करके अपना भाग्य खुद बना सकते हैं। इसी बात को ठीक तरह से समझाने के लिए गुरूजी ने तीन कटोरे लिए। पहले कटोरे में एक आलू रखा, दूसरे में अंडा और तीसरे कटोरे में चाय की पत्ती डाल दी।

अब तीनों कटोरों में पानी डालकर उनको गैस पर उबलने के लिए रख दिया।






सभी छात्र ये सब हैरान होकर देख रहे थे लेकिन किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। बीस मिनट बाद जब तीनों बर्तन में उबाल आने लगे, तो गुरूजी ने सभी कटोरों को नीचे उतरा और आलू, अंडा और चाय को बाहर निकाला।

अब उन्होंने सभी छात्रों से तीनों कटोरों को गौर से देखने के लिए कहा। अब भी किसी छात्र को समझ नहीं आ रहा था। आखिर में गुरु जी ने एक बच्चे से तीनों (आलू, अंडा और चाय) को स्पर्श करने के लिए कहा। जब छात्र ने आलू को हाथ लगाया तो पाया कि जो आलू पहले काफी कठोर हो गया था और पानी में उबलने के बाद काफी मुलायम हो गया था।

जब छात्र ने अंडे को उठाया तो देखा जो अंडा पहले बहुत नाज़ुक था उबलने के बाद वह कठोर हो गया है। अब बारी थी चाय के कप को उठाने की। जब छात्र ने चाय के कप को उठाया तो देखा चाय की पत्ती ने गर्म पानी के साथ मिलकर अपना रूप बदल लिया था और अब वह चाय बन चुकी थी।
अब गुरु जी ने समझाया, हमने तीन अलग-अलग चीजों को समान विपत्ति से गुज़ारा, यानी कि तीनों को समान रूप से पानी में उबाला लेकिन बाहर आने पर तीनों चीजें एक जैसी नहीं मिली।

आलू जो कठोर था वो मुलायम हो गया, अंडा पहले से कठोर हो गया और चाय की पत्ती ने भी अपना रूप बदल लिया। उसी तरह यही बात इंसानों पर भी लागू होती है।


*शिक्षा:-*
सभी को समान अवसर मिलते हैं और मुश्किले आती हैं लेकिन ये पूरी तरह आप पर निर्भर है कि आप परेशानी का सामना कैसा करते हैं और मुश्किल दौर से निकलने के बाद क्या बनते हैं।

Monday, June 12, 2023

कड़वी सच्चाई माफी चाहूंगा।

 कड़वी सच्चाई माफी चाहूंगा।



 रमाशंकर की कार जैसे ही सोसायटी के गेट में घुसी, गार्ड ने उन्हें रोक कर कहा..




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“साहब, यह महिला आपके नाम और पते की चिट्ठी लेकर न जाने कब से भटक रही हैं।”
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रमाशंकर ने चिट्ठी लेकर देखा, नाम और पता तो उन्हीं का था, पर जब उन्होंने चिट्ठी लाने वाली की ओर देखा तो उसे पहचान नहीं पाए।
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चिट्ठी एक बहुत ही गरीब कमजोर महिला ले कर आई थी। उनके साथ बीमार सा एक लड़का भी था।
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उन्हें देख कर रमाशंकर को तरस आ गया। शायद बहुत देर से वे घर तलाश रही थी।

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उन्हें अपने घर लाकर कहा, “पहले तो आप बैठ जाइए।” इसके बाद नौकर को आवाज़ लगाई, “रामू इन्हें पानी ला कर दो।”
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पानी पी कर महिला ने थोड़ी राहत महसूस की तो रमाशंकर ने पूछा, “अब बताइए किससे मिलना है?”
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“तुम्हारे बाबा देवकुमार जी ने भेजा है। बहुत दयालु हैं वह। मेरे इस बच्चे की हालत बहुत ख़राब है।
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गाँव में इलाज नहीं हो पा रहा था। किसी सरकारी अस्पताल में इसे भर्ती करवा दो बेटा, जान बच जाए इसकी।
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इकलौता बच्चा है,” इतना कहते कहते महिला का गला रुँध गया।आंखे नम हो गई,

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रमाशंकर ने उन्हें गेस्टरूम में ठहराया। पत्नी से कह कर खाने का इंतज़ाम कराया।
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अगले दिन फ़ैमिली डॉक्टर को बुलाकर सारी जाँच करवा कर इलाज शुरू करवा दिया।
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महिला कहती रही कि किसी सरकारी अस्पताल में इलाज करवा दो, पर रमाशंकर ने उनकी एक नहीं सुनी। बच्चे का पूरा इलाज अच्छी तरह करवा दिया।
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बच्चे के ठीक होने पर महिला गाँव जाने लगी तो रमाशंकर को तमाम दुआएँ दीं।खूब आभार व्यक्त किया छोटे बच्चे ने भी रमा शंकर जी के पैर छुए
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रमाशंकर ने दिलासा देते हुए कुछ पैसे दिए और एक चिट्ठी दे कर कहा, “इसे पिताजी को दे दीजिएगा।”

It's
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गाँव पहुँच कर देवकुमारजी को वह चिट्ठी दे कर महिला बहुत तारीफ़ करने लगी
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“आप का बेटा तो देवता है। कितना ध्यान रखा हमारा! अपने घर में रख कर इलाज करवाया।


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देवकुमार चिट्ठी पढ़ कर दंग रह गए...
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उसमें लिखा था, “अब आप का बेटा इस पते पर नहीं रहता ... कुछ समय पहले ही मैं यहाँ रहने आया हूँ। पर मुझे भी आप अपना ही बेटा समझें। इनसे कुछ मत कहिएगा।
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आपकी वजह से मुझे इन अतिथि माता से जितना आशीर्वाद और दुआएँ मिली हैं, उस उपकार के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा। .. आपका रमाशंकर।”
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देवकुमार जी के हाथ अनायास ही उस अनजान देवता के सम्मान में जुड़ गए,